क जानी-पहचानी सड़क पर हम फिर से निकल पड़े थे. असम के दक्षिणी शहर सिलचर से क़रीब दो घंटे दूर आमराघाट गाँव का सफ़र इस बार कब ख़त्म हुआ पता ही नहीं चला. इस बार गाँव में घुसते वक़्त दुकानदारों से लेकर सब्ज़ी वालों के चेहरे हमें देखकर मुस्कुरा उठे. गाड़ी उसी घर के सामने रुकी, जिसमें से पिछली बार एक पत्नी और माँ का सिसकना ही सुनाई पड़ता था, जिसके पड़ोसियों की नज़रें हर मेहमान को बारीक़ी से परखती थीं. आँगन में छोटे मंदिर के सामने इस बार भी अगरबत्ती जल रही थी और साथ में एक बड़ा सा दीया भी लेकिन इस बार प्रार्थना में शुक्रिया का भाव ज़्यादा और दर्द की टीस कम थी. जुलाई, 2018 को इसी मंदिर में आँसुओं से भरी एक पत्नी प्रार्थना करके पति से मिलने सिलचर सेन्ट्रल जेल गईं थीं. वापसी ख़ाली हाथ हुई थी. उनके पति की भारतीय नागरिकता पर सवाल उ ठा था औ र मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत (विदेशी ट्राइब्यूनल) ने नोटिस भेज दिया था. अदालत में हाज़िर न होने के चलते उन्हें सिलचर के डिटेंशेन कैंप में क़ैदी बन दिया गया था. असम राज्य में पिछले तीन दशकों से विदेशी नागरिकों या 'घुसपैठियों' की पहच...