राहत और बचाव कार्य में लगे एनडीआरएफ कर्मी प्रभावित इलाक़ों में लोगों, खासकर बच्चों को निकालने का काम कर रहे हैं.
ऐसा बताया जा रहा है कि केरल ने बीते 100 वर्षों में ऐसी तबाही नहीं देखी.
बाढ़ में जान-माल का भारी नुकसान बताया जा रहा है. मवेशियों और मुर्गे-मुर्गियों तक को प्रभावित इलाक़ों से निकालने का काम हो रहा है
लोगों के घर ढह गए हैं. राज्य सरकार का कहना है कि बचाव कार्य में लगे लोग काफ़ी नहीं हैं.
पानी से घिरे इलाक़ों में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से निकालने का काम जारी है. बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है.
मौसम विभाग ये चेतावनी दे चुका
है कि अगले कुछ दिनों में केरल में मूसलाधार बारिश होने के कारण बाढ़
प्रभावित 13 ज़िलों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
केरल सरकार ने कहा है कि मारे गए लोगों में से कई लोग भूस्खलन के कारण मलबे के नीचे दब गए हैं.
कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने फ्री सेवा का एलान किया है ताकि लोगों के बीच संपर्क बना रहे.
बात 1957 की है. दूसरी लोकसभा
में भारतीय जन संघ के सिर्फ़ चार सांसद थे. इन सासंदों का परिचय तत्कालीन
राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन से कराया गया.
तब राष्ट्रपति ने हैरानी
व्यक्त करते हुए कहा कि वो किसी भारतीय जन संघ नाम की पार्टी को नहीं
जानते. अटल बिहारी वाजपेयी उन चार सांसदों में से एक थे.
तब उन्होंने जनसंघ का नाम नहीं
सुना हो लेकिन आज जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनने के सफ़र में भाजपा ने
कई पड़ाव तय किए और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है.
भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी और सांसद से देश के प्रधानमंत्री तक के सफ़र में अटल बिहारी वाजपेयी ने कई पड़ाव तय किए हैं.
नेहरु-गांधी परिवार के
प्रधानमंत्रियों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भारत के इतिहास में उन
चुनिंदा नेताओं में शामिल हुआ जिन्होंने सिर्फ़ अपने नाम, व्यक्तित्व और
करिश्मे के बूते पर सरकार बनाई.
एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए शुरुआती सफ़र आसान नहीं था.
25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के
एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा
ग्वालियर के विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज
में हुई.
उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में
स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने
राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया.
1951 में वो भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे. अपनी कुशल भाषण शैली से राजनीति के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने रंग जमा दिया.
वाजपेयी लखनऊ में एक लोकसभा उप
चुनाव हार गए थे. 1957 में जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा
और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी
ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो दूसरी लोकसभा में पहुंचे. अगले पाँच दशकों के उनके संसदीय करियर की यह शुरुआत थी.
1968 से 1973 तक वो भारतीय
जनसंघ के अध्यक्ष रहे. विपक्षी पार्टियों के अपने दूसरे साथियों की तरह
उन्हें भी आपातकाल के दौरान जेल भेजा गया.
इस प्राकृतिक आपदा में तीन लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं.
1977 में जनता पार्टी सरकार
में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में
उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो इसे अपने जीवन का सबसे सुखद क्षण बताते
रहे.
1980 में वो बीजेपी के
संस्थापक सदस्य रहे. 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान
वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे.
16 मई 1996 को वो पहली बार
प्रधानमंत्री बने लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई
1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा.
लेकिन इस बार एआईएडीएमके ने
गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लिया तो 13 महीने बाद ही उनकी सरकार गिर गई.
इसके बाद एक बार फिर आम चुनाव हुए.
1999 में चुनाव राष्ट्रीय
जनतांत्रिक गठबंधन के घोषणापत्र पर लड़े गए और इसमें वाजपेयी के नेतृत्व को
एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया. गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी तीसरी
बार प्रधानमंत्री बने.
Comments
Post a Comment