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चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

ऐसी ही एक तस्वीर मिस्र की अभिनेत्री नादिया अब्देल वाहेद की है. उन्होंने वान लियो से कहकर अपनी 18 मुद्राओं की तस्वीरें खिंचवाईं थीं.
हर तस्वीर में वो अपने बदन से एक कपड़ा उतारती कैमरे में क़ैद की गई थी. ये फोटो 1959 में ली गई थीं. जिसमें वो अर्धनग्न अवस्था में अपनी जुराबें उतारती दिखाई देती है.
सिर्फ़ महिलाओं की ही नहीं, मर्दों की भी ऐसी तस्वीरें हैं, जिसमे वो अपने शरीर की नुमाइश करते दिखते हैं. ऐसी ही एक फोटो मिस्र के फोटोग्राफर जमाल यूसुफ़ ने ली थी. जिसमें तीन लोग केवल एक कपड़ा लपेटे हुए अपने बदन को दिखा रहे हैं.
मिस्र की ऐसी ही तस्वीरों में से एक में एक शेफ़ एक स्थानीय मिठाई क्नाफ़ेह बनाता कैमरे में क़ैद किया गया है.
उस दौर की कई तस्वीरों में तकनीक की मदद से कई प्रयोग भी हुए थे 1922 में बेथलहम शहर में खींची गई एक तस्वीर में एक ही इंसान अलग-अलग कपड़े पहने हुए अलग मुद्राओं में नज़र आता है.
इसी तरह लेबनान में 1899 में पैदा हुई मैरी अल-ख़ज़ान नाम की फोटोग्राफर ने घोड़े पर सवार एक महिला और एक अरबी शेख को मिलाकर तस्वीर बनाई थी. इसमें महिला, अरब शेख के पीछे बड़े कद में नज़र आती है.
मध्य-पूर्व का इतिहास उठा-पटक वाला रहा है. बहुत सी तस्वीरों में हथियारबंद लोग भी दिखते हैं.
लेबनान के फोटोग्राफर हाशेम अल मदानी ने अपने क़स्बे सिडोन में ऐसी सैकड़ों फोटो खींची थीं. 1970 के दशक की इन तस्वीरों में बच्चे और पुरुष हथियारों के साथ दिखाई देते हैं. ये लेबनान में गृह युद्ध छिड़ने से पहले की तस्वीरें हैं.
हाल ही में अरब इमेज फाउंडेशन के दफ़्तर आए एक आदमी ने इसमें से एक फोटो देखकर कहा कि ये उसके दादा की तस्वीर है.
अरब इमेज फाउंडेशन को उम्मीद है कि स ऑनलाइन प्रदर्शनी को देखकइर लोग अरब देशों के बारे में अपना नज़रिया बदलेंगे. मौराकेश का मानना है कि उनके पास जो तस्वीरें हैं, उन पर पहला हक़ जनता का ही है.
उनका संरक्षण कर के वो तस्वीरों को जनता के सामने रख रहे हैं. अगर कोई इंसान इन्हें देखकर गुज़रे हुए वक़्त को याद करेगा तो उसके अंदर कई जज़्बात पैदा होंगे. उसे मध्य-पूर्व को देखने का एक नया नज़रिया मिलेगा.
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