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Showing posts from May, 2019

कट्टपंथियों को नहीं रोकेंगे मोदी?

राम जन्म भूमि आंदोलन के समय से जो पार्टी का हा र्डकोर धड़ा है, वो सवाल करेगा कि अगर अब आपने हिंदुत्व विचारधारा को स्थापित नहीं किया संस्थाओं में तो कब करेंगे? इससे बड़ी जीत क्या हो सकती है? ये दबाव आएगा तो मुझे नहीं लगता कि मोदी इसे रोकेंगे या पीछे हटेंगे. इसी चुनाव में देखा गया है कि मानक बिल्कुल गिरते जा रहे हैं. दस साल पहले क्या कोई कल्पना करता था कि प्रज्ञा ठाकुर बीजेपी की स्टार उम्मीदवार होंगी. उनकी जीत पर आज जश्न मनाया जा रहा है. ये एक तरह का ज़हर है जिसे आप दोबारा बोतल में नहीं डाल सकते हैं. बहुसंख् यकवाद के ख़तरे इस चुनाव में ब ड़ी स्पष्ट रूप से उभरकर आए हैं. ये चुनाव उन परिस्थितियों में हुआ जहां भारत की आर्थिक व्यवस्था उतनी सुदृढ़ नहीं है जितना प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं. वास् तविक ग्रोथ रेट चार या साढ़े चार प्रति शत है. बेरोज़गारी की समस्या है. कृषि क् षेत्र में संकट है. इस सबके बाद भी अगर जनता ने इन्हें वोट दि या है तो यही निष्कर्ष निकलता है कि वो मज़बूत नेता चाहते थे. दूसरा आज हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जहां बहुसंख्यकवाद का बहुसंख्यकों पर ज़्यादा असर नहीं...